UP पंचायत चुनाव: 'विदाई' से पहले मची लूट! प्रधान और सचिवों में सरकारी धन 'ठिकाने' लगाने की होड़।
7 दिन बाद खत्म हो रहा है ग्राम प्रधानों का कार्यकाल; गांवों में आनन-फानन में कागजों पर दौड़ने लगे विकास कार्य
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की ग्रामीण राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मची है। प्रदेश की करीब 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने में अब महज 7 दिन शेष रह गए हैं। 26 मई को कार्यकाल समाप्त होने की उल्टी गिनती शुरू होते ही ग्रामीण इलाकों में विकास की 'गंगा' अचानक बहुत तेज बहने लगी है। आरोप लग रहे हैं कि यह विकास जमीन पर कम और कागजों में ज्यादा है, ताकि जाते-जाते सरकारी खजाने को खाली किया जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही खबरें बताती हैं कि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव (सेक्रेटरी) की जुगलबंदी इस समय 'ओवरटाइम' कर रही है। जिन गांवों में पिछले साढ़े चार साल से विकास कार्य ठप पड़े थे, वहाँ पिछले 48 घंटों में अचानक गिट्टी, बालू और ईंटें गिरने लगी हैं।
'डिजिटल सिग्नेचर' का आखिरी खेल!
सूत्रों के मुताबिक, प्रधान और सचिवों का पूरा ध्यान इस समय ग्राम निधि के खातों में बची धनराशि को ठिकाने लगाने पर है। डिजिटल सिग्नेचर (DSC) के जरिए आनन-फानन में पुरानी और अधूरी योजनाओं के भुगतान ट्रांसफर किए जा रहे हैं। कहीं पुरानी ईंटों पर ही दोबारा खड़ंजा बिछाने का दावा किया जा रहा है, तो कहीं बिना काम पूरा हुए ही ठेकेदारों और करीबियों के खातों में लाखों रुपये का भुगतान भेजा जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है:साहब! 5 साल तक तो प्रधान जी ने नाली और सड़क की सुध नहीं ली। अब जब सिर्फ एक हफ्ता बचा है, तो रातों-रात खड़ंजे लगाए जा रहे हैं। यह विकास नहीं, बल्कि चुनाव में हुए खर्च की भरपाई और बचे हुए बजट को हजम करने का खेल है।
प्रशासक राज आने से पहले मची है छटपटाहट
उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि 26 मई को कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम पंचायतों की कमान प्रशासनिक समिति या प्रशासकों (सरकारी अफसरों) के हाथ में चली जाएगी। वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन और ओबीसी आरक्षण के पेंच के कारण चुनाव टल चुके हैं और इसमें कम से कम 6 महीने का समय लग सकता है।
प्रधानों को पता है कि एक बार डोंगल (Digital Signature) ब्लॉक हो गया और खाता सीज हो गया, तो वे फूटी कौड़ी भी नहीं निकाल पाएंगे। यही वजह है कि बचे हुए इन 7 दिनों में दिन-रात एक करके फाइलों को हरी झंडी दी जा रही है।
जांच के घेरे में आ सकते हैं आखिरी दिनों के भुगतान
पंचायती राज विभाग के उच्च सूत्रों की मानें तो कार्यकाल के अंतिम पखवाड़े (15 दिनों) में हुए सभी वित्तीय भुगतानों पर प्रशासन की पैनी नजर है। जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिए जा रहे हैं कि कार्यकाल समाप्त होने के तुरंत बाद इन आखिरी दिनों में किए गए कार्यों की भौतिक जांच (Physical Verification) कराई जाए।
अब देखना यह होगा कि इन 7 दिनों में प्रधान और सचिव की 'जुगलबंदी' सरकारी धन को ठिकाने लगाने में कामयाब होती है, या फिर प्रशासन की टेढ़ी नजर इस 'अंतिम लूट' पर ब्रेक लगा पाती है।








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