योगी आदित्यनाथ और माता प्रसाद एक साथ नजर आए, सत्ता की लकीरें मंच पर हुईं धुंधली
आमने-सामने रहने वाले मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष एक मंच पर साथ बैठे
महोत्सव मंच पर सकारात्मक संवाद से दिया विकास और सहयोग का संदेश
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश विधानसभा में जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अलग-अलग पंक्तियों में बैठते हैं और बहस के दौरान नोक-झोंक आम बात है, वहीं बुधवार को सिद्धार्थनगर महोत्सव के मंच पर राजनीति का एक अलग और सकारात्मक दृश्य देखने को मिला। जनपद स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सिद्धार्थनगर महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और इटवा से समाजवादी पार्टी के विधायक व नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय एक ही मंच पर, एक साथ बैठे नजर आए। यह दृश्य न केवल राजनीतिक शिष्टाचार का उदाहरण बना, बल्कि जनपद के विकास को लेकर साझा सोच का भी प्रतीक रहा।
सिद्धार्थनगर में आयोजित सिद्धार्थनगर महोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के मंच पर विराजमान होने के कुछ समय बाद जब नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय पहुंचे, तो मंच पर उन्हें अपने बगल की कुर्सी पर बैठने का संकेत किया। इसके बाद बगल में बैठे प्रदेश सरकार के मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने राजनीतिक मर्यादा और सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए स्वयं आगे की कुर्सी पर जाकर बैठ गए। इसके बाद मंच पर लगभग एक घंटे से अधिक समय तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत चलती रही। दोनों नेताओं की गुफ्तगू ने यह संदेश दिया कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद जनहित और विकास के मुद्दों पर संवाद संभव है। संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई एक मंच तो हो, जहां हम सभी एक-दूसरे के साथ सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य करने का संदेश दें। आज उसी सोच का परिणाम है कि सिद्धार्थनगर विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीएम ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष न केवल स्वयं कार्यक्रम में आए, बल्कि डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र की विधायक सैय्यदा खातून को भी साथ लेकर आए, जो लोकतांत्रिक परंपराओं और जनपद के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का परिचायक है। राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद और सहयोग की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। सिद्धार्थनगर महोत्सव का यह मंच जहां सांस्कृतिक उत्सव का केंद्र रहा, वहीं यहां राजनीति का एक सकारात्मक और प्रेरक चेहरा भी सामने आया। जनपदवासियों के लिए यह क्षण यह संदेश छोड़ गया कि विकास की राह में राजनीतिक मतभेद आड़े नहीं आने चाहिए, बल्कि साझा मंच पर बैठकर संवाद और सहयोग ही आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है।






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