गोरखपुर के पिपरौली के कैली में 12 लाख से अधिक खर्च, फिर भी अधूरा अंत्येष्टि स्थल!
न रास्ता, न पूरा फर्श; कमरों की छत से पानी रिसने का आरोप, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
पिपरौली, गोरखपुर। विकासखंड पिपरौली की ग्राम पंचायत कैली में सरकारी धन से बनाए जा रहे अंत्येष्टि स्थल की स्थिति सवालों के घेरे में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक निर्माण पर 12 लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च होने के बावजूद मौके पर कई काम अधूरे दिखाई दे रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए समुचित रास्ता तक उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंत्येष्टि स्थल का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण उन्हें इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। परिसर में फर्श का काम अधूरा बताया जा रहा है, जबकि कमरों की छत से बारिश के दौरान पानी रिसने की शिकायत भी सामने आई है। परिसर में साफ-सफाई की स्थिति को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
12 लाख से ज्यादा खर्च, फिर भी अधूरा काम
उपलब्ध वित्तीय विवरण के अनुसार अंत्येष्टि स्थल पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 12 लाख रुपये, 2025-26 में करीब 13 हजार रुपये और 2026-27 में करीब 8 हजार रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। यानी सरकारी धनराशि खर्च होने के बावजूद निर्माण स्थल पर जरूरी कार्य अभी तक पूरा नहीं होने की बात सामने आ रही है।
छत से पानी रिसने की शिकायत
ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दौरान अंत्येष्टि स्थल के कमरों की छत से पानी रिसता है। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में निर्धारित मानकों और गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया।
रास्ता नहीं होने से बढ़ी परेशानी
अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि किसी सार्वजनिक उपयोग के निर्माण स्थल तक पहुंचने की व्यवस्था ही पूरी नहीं है तो इसका ग्रामीणों को प्रभावी लाभ कैसे मिलेगा।
जांच की मांग, जिम्मेदारी तय करने की उठी आवाज
ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर स्थलीय निरीक्षण कराने, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और अधूरे कार्य को जल्द पूरा कराने की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि सरकारी धनराशि के खर्च और निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि 12 लाख रुपये से अधिक खर्च होने के बाद भी अंत्येष्टि स्थल अधूरा क्यों है? निर्माण की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई और अधूरे कार्य के लिए जिम्मेदारी किसकी है?








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