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धानी ब्लॉक में 15वें वित्त का ‘खेल’! घर बैठे जियो टैग, दूसरे जनपद से भुगतान का आरोप



घर बैठे जियो टैग, दूसरे जनपद से भुगतान!

धानी ब्लॉक के करमाहा में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर करीब 1.50 लाख रुपये भुगतान पर सवाल, बिना जियो टैग भुगतान का भी आरोप

धानी, महराजगंज। विकासखंड धानी में 15वें वित्त आयोग से कराए जा रहे विकास कार्यों के भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत करमाहा में इंडिया मार्का हैंडपंप मरम्मत कार्य के नाम पर करीब 1.50 लाख रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है। आरोप है कि कार्यों का मौके पर सत्यापन किए बिना और जियो टैग की प्रक्रिया पूरी किए बगैर भुगतान किया गया।

मामले को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह है कि धानी ब्लॉक के 15वें वित्त से संबंधित भुगतानों की प्रक्रिया दूसरे जनपद से किए जाने की बात सामने आ रही है। साथ ही, कुछ कार्यों में बिना जियो टैग के ही भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। यदि ऐसा हुआ है तो भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की जांच बड़ा सवाल बन जाती है।

घर बैठे जियो टैग करने का आरोप

करमाहा ग्राम पंचायत में इंडिया मार्का हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर किए गए भुगतान को लेकर आरोप है कि जियो टैगिंग के लिए संबंधित अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। आरोप लगाया गया है कि घर पर बैठकर ही जियो टैग की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

यही नहीं, मौके की वास्तविक स्थिति की तस्वीर लेने के बजाय पहले से मौजूद फोटो की ही फोटो खींचकर रिकॉर्ड तैयार करने और उसी के आधार पर भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भी आरोप है।

करीब डेढ़ लाख के भुगतान ने खड़े किए सवाल

हैंडपंप मरम्मत के नाम पर करीब 1.50 लाख रुपये के भुगतान को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। आखिर कितने हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई? किन स्थानों पर कार्य हुआ? क्या प्रत्येक कार्य का मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया? जियो टैग किस स्थान से किया गया? और भुगतान से पहले संबंधित अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया या नहीं?

इन सवालों का जवाब जियो टैग रिकॉर्ड, कार्यस्थल की तस्वीरों, माप पुस्तिका और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच से सामने आ सकता है।

दूसरे जनपद से भुगतान की प्रक्रिया क्यों?

मामले में दूसरा बड़ा सवाल दूसरे जनपद से भुगतान किए जाने को लेकर है। यदि धानी ब्लॉक की ग्राम पंचायतों के 15वें वित्त के कार्यों का भुगतान किसी दूसरे जनपद से किया जा रहा है, तो इसकी प्रक्रिया क्या है और ऐसा किस स्तर के निर्देश पर किया जा रहा है? इसकी भी जांच की जरूरत है।

जांच हुई तो सामने आएगी पूरी तस्वीर

15वें वित्त की धनराशि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए खर्च की जाती है। ऐसे में भुगतान से पहले कार्य की वास्तविक स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण माना जाता है। करमाहा के मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ धानी ब्लॉक में 15वें वित्त से कराए गए अन्य कार्यों के भुगतान और जियो टैग रिकॉर्ड की भी जांच कराई जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अब देखना यह है कि दूसरे जनपद से भुगतान और बिना जियो टैग भुगतान के आरोपों पर जिम्मेदार अधिकारी क्या जवाब देते हैं और जांच में क्या सामने आता है।

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