प्रसूता की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल: आशा कार्यकर्ता की भूमिका और निजी अस्पतालों से सांठगांठ की जांच कब?
गोरखपुर! कैंपियरगंज क्षेत्र के बलुआ गांव की एक प्रसूता की निजी हॉस्पिटल में हुई मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि प्रसूता का मायका कैंपियरगंज तहसील क्षेत्र बलुआ में है, जबकि बलुआ का स्वास्थ्य संबंधी क्षेत्राधिकार महराजगंज जनपद के धानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आता है।
इसके बावजूद उसे कैंपियरगंज ले जाने की जरूरत क्या था?
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर आशा कार्यकर्ता ने प्रसूता को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने के बजाय निजी अस्पताल जाने की सलाह क्यों दी? क्या मरीज को बेहतर उपचार के नाम पर निजी अस्पताल भेजा गया, या इसके पीछे किसी प्रकार का आर्थिक लाभ और कमीशनखोरी का खेल था?
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार देखने में आता है कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा मरीजों को सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी अस्पतालों में भेजने की सलाह दी जाती है। यदि इस मामले में भी ऐसा हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रसूता की मौत ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र और योजनाएं मौजूद हैं तो मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है?
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।








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