धानी सीएचसी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, ग्रामीणों ने लगाए कई आरोप।
महराजगंज। जिले के धानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें बिना एक्स-रे मशीन के वर्षों से एक्स-रे टेक्निशियन की तैनाती, जन्म प्रमाण पत्र में कथित वसूली, प्रसूताओं को मिलने वाले भोजन में अनियमितता तथा डॉक्टरों की समय पर अनुपस्थिति जैसे मुद्दे शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में लंबे समय से एक्स-रे मशीन उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद एक्स-रे टेक्निशियन की तैनाती बरकरार है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा ही नहीं है तो संबंधित कर्मचारी की भूमिका क्या है और उनकी सेवाओं का उपयोग किस कार्य में किया जा रहा है।
जन्म प्रमाण पत्र में वसूली के आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान कई बार पैसे की मांग की जाती है।
वही ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रसूताओं के भोजन को लेकर भी शिकायतें
अस्पताल में भर्ती होने वाली प्रसूताओं को सरकार की ओर से निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए, लेकिन कई लोगों का आरोप है कि भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर अनियमितताएं देखने को मिलती हैं। कुछ तीमारदारों का कहना है कि कागजों पर व्यवस्थाएं बेहतर दिखाई जाती हैं, जबकि वास्तविक स्थिति अलग है।
डॉक्टरों की उपस्थिति पर सवाल
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कई बार डॉक्टर निर्धारित समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की उपस्थिति की निगरानी वीडियो कॉल के माध्यम से की जाती है।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित रूप से वीडियो कॉल के जरिए निगरानी की जा रही है तो फिर डॉक्टरों की अनुपस्थिति और देरी की शिकायतें क्यों मिल रही हैं। इस दावे की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सीएचसी अधीक्षक की जिम्मेदारी पर चर्चा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के संचालन, स्टाफ की निगरानी, मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी अधीक्षक की होती है। ऐसे में अस्पताल से जुड़ी शिकायतों के बीच लोगों की नजर अब प्रबंधन व्यवस्था पर भी है।
जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर लोगों की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।








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